सॉफ्टवेयर डेवलपर कैसे बने, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मे किस प्रकार की नौकरी मिल सकती है, सॉफ्टवेयर डेवलपर का इंटरव्यू कैसे पास करें-

மனிதவள மேலாண்மை

सॉफ्टवेयर डेवलपर कैसे बने, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मे किस प्रकार की नौकरी मिल सकती है, सॉफ्टवेयर डेवलपर का इंटरव्यू कैसे पास करें-

आजकल ज्यादातर युवा आईटी फिल्ड में जाना चाहते हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह इस फिल्ड में जॉब्स की संख्या अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है जिसके वजह से जॉब्स मिलने में आसानी होती है और दूसरा इसमें बाकी नौकरियों के तुलना में सेलरी भी बहुत अच्छी मिलती है और साथ ही लगातार कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलता है। सॉफ्टवेयर डेवलपर ज्यादातर स्वतंत्र रुप से फ्रीलांस के तौर पर कार्य करते हैं या फिर किसी कंपनी के साथ जुड़कर भी वेबसाइट बनाने का काम करते हैं। वर्तमान समय में सॉफ्टवेयर फिल्ड में लोगों का झुकाव बहुत ही अधिक देखने को मिल रहा है। सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिये किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 पास होना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ होना तथा कंप्यूटर का नॉलेज होना भी बहुत ही जरुरी होता है। इसके अलावा कुछ कोडिंग लैंग्वेजेज जैसे- C++, जावा, पायथन, एक्सएमएल तथा एचटीएमएल की जानकारी होने के साथ ही डेटाबेस के बेसिक्स का क्लीयर होना भी इस फिल्ड में कैरियर बनाने के लिये बहुत ही अनिवार्य है। इसके बाद आप इस फिल्ड से संबंधित कई तरह के कोर्सेस में अपने मन मुताबिक कोर्स करके इस फिल्ड में अपना कैरियर बना सकते हैं।  आप बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, बीएससी इन कंप्यूटर साइंस,बीसीए के बाद एमसीए और अगर आप कॉमर्स के छात्र हैं तो बीकॉम इन कंप्यूटर सांइस करने के बाद आप एमबीए आईटी करके भी इस फिल्ड में कैरियर बना सकते हैं।

सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट- सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट एक कंप्यूटर प्रोग्रामर है जो हाई लेवल के डिजाइन च्वाइस, सॉफ्टवेयर कोडिंग, टूल और प्लेटफॉर्म बनाता है। एक सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट को सॉफ्टवेयर के पूरे डेवलपमेंट का डिजाइन तैयार करना होता है। इसके साथ ही एक सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट को बिजनेस तथा टेक्नोलॉजी की अच्छी समझ होनी भी बहुत ही आवश्यक है।

सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मैनेजर– एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का मुख्य काम सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग, वेब एप्लिकेशन तथा वेब सर्विसेज डिजाइन करना होता है। इसके अलावा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मैनेजर का काम मेडिक रिर्सच से लेकर फाइनेंस तक रेंज के सॉफ्टवेयर डेवलपर का टीम को लीड करना होता है। साथ ही स्टाफ ही हायरिंग करना, उन्हें ट्रेन तथा मैनेज करना भी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मैनेजर के काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। साथ ही वेबसाइट की जरुरतों और डिजाइन के बारे में समझाने तथा ज्यादा जानकारी के लिये मैनेजमेंट के साथ ही साथ कई बार क्लाइंट से भी मिलना पड़ता है।

प्रोडक्ट मैनेजर- प्रॉडक्ट मैनेजर का काम किसी प्रॉडक्ट के बारे में जानकारी हासिल करना, किसी भी सॉफ्टवेयर के बनने में लगने वाले खर्च तथा समय पर नजर रखना साथ ही उसके लिये बजट तैयार करने और प्रोडक्ट का क्वालिटी सेलेक्ट करना तथा प्रोडक्ट की डेवलपमेंट के लिए काम करना होता है। साथ ही पूरी टीम को मैनेज करना भी इनके काम हिस्सा होता है। ये अपने प्रोजेक्ट के डीम लीडर भी होते हैं ऐसे में इनका काम बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है।

फ्रंट एंड डेवलपर- किसी भी सॉफ्टवेयर को अथवा एप्लिकेशन को डेवलप करने में एक फ्रंट एंड डेवलपर का काम सबसे महत्वपूर्ण होता है। ग्राफिक यूजर इमटरफेस को डिजाइन करने का काम फ्रंटएंड डेवलपर का होता है। इनका काम यूजर फ्रेंडली एप्लिकेशन इंटरफेस को तैयार करना होता है।

बैक एंड वेब डेवलपर- किसी भी वेबसाइट के बुनियादें ढांचे को बनाने का काम एक बैक एंड वेब डेवलपर का होता है। वेबसाइट के पूरे तकनीकी बनावट की जिम्मेदारी बैक एंड डेवलपर की होती है। साथ ही साथ ये सुनिश्चित करना कि ये सही से काम कर रहा है कि नहीं ये भी इनके काम का ही हिस्सा होता है। साथ ही इनको वेबसाइट पर नये पेज ऐड करने और कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में बात करने के लिये मैनेजमेंट के साथ मिलना भी पड़ता है।

कंप्यूटर प्रोग्रामर- कंप्यूटर प्रोग्रामर कंप्यूटर एप्लिकेशन तथा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम सही तरिके से काम करे सके इसके लिये ये प्रोग्रामर कोड और टेस्ट कोड लिखने का काम करते हैं। साथ ही ये सॉफ्टवेयर डेवलपर तथा सॉफ्टवेयर इंजीनियर द्वारा बनाये गये प्रोग्राम डिजाइन्स को इस तरिके से ऐसे निर्देशों में बदलते हैं जो किसी भी कंप्यूटर का अनुसरण कर सकता है।

इसके अलावा फुल स्टैक डेवलपर, इनका डिमांड वर्तमान समय में सबसे ज्यादा है। हर सॉफ्टवेयर तथा आईटी कंपनी में इन मांग सबसे ज्यादा है और इसकी वजह है इनका ऑलराउंडर होना यानि कि ये बैकएंड वेब डेवलपर और साथ ही फ्रंटएंड वेब डेवलपर सबका काम अकेले करने में माहिर होते हैं। इसके अलावा भी वेब डेवलपर, कंप्यूटर एंड इनफोर्मेशन मैनेजर और कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर तथा सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैसे कई नौकरियों के मौके हैं

सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी के लिये इंटरव्यू अब बात आती है सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी के लिये इंटरव्यू कैसे क्लीयर करें, तो सबसे पहले तो याद रखें हर जॉब इंटरव्यू की तरह सॉफ्टवेयर डेवलपर की इंटरव्यू में भी कुछ ऐसी बुनियादे बातें हैं जिनका ध्यान रखकर आप बड़ी आसानी से इंटरव्यू पास कर सकते हैं। सबसे पहले तो आप जिस भी कंपनी में इंटरव्यू के लिये जा रहे हों वहाँ के बारे में अच्छे से पता करें, कंपनी क्या और कैसे काम करती है, कंपनी के प्रोडक्ट और सर्विसेस तथा उसके क्लाइंट कौन-कौन से हैं इन सारी बातों की जानकारी आपको उस कंपनी के वेबसाइट पर जाकर मिल जाएगी। ऐसे में इंटरव्यू से पहले आप उस कंपनी के वेबसाइट पर जाकर अच्छे से सारी जानकारी हासिल कर लें। हो सके तो अपना रेज्यूमे किसी प्रोफेशनल से ही तैयार करवायें, और साथ ही अपने वर्क एक्सपीरियेंस, क्वॉलिटी,अपने स्ट्रेन्थ तथा वीकनेस के बारे में भी लिखें। इंटरव्यू में जाने से पहले अपना आत्मविश्वास जरुर बनाये रखें। इंटरव्यू के दौरान हमेशा एक साकारात्मक और लर्निंग एटीट्यूड बनाएं रखें। इंटरव्यूअर आपसे जो भी सवाल पूछे उसका जवाब आप थोड़ा समय लेकर और सोच-समझ कर दें, किसी भी तरह की जल्दीबाजी ना करें। साथ ही ध्यान रखें कि सवालों का जवाब आपको आता हो उनका ही उत्तर दें, बेवजह बातों को घुमाफिराकर बोलने की गलती ना करें। खुद को शांत तथा फोकस्ड रखें साथ अगर आप पहले किसी कंपनी में जॉब कर चुके हैं तो जाहिर सी बात है इंटरव्यीअर आपसे आपकी पिछली कंपनी तथा वहाँ से नौकरी छड़ने की वजह के बारे में भी जरुर सवाल करेगा, ऐसे आप कभी भी अपनी पिछली कंपनी के बारे में बुराई करने की गलती ना करें। साथ अपने काम करने के वाजिब वजह के बारे में अगर संभव हो तो जरुर बताएं।